Friday, March 13, 2009

व्यावसायिक प्रशिक्षण के मामले में भारत काफी पीछे

अनौपचारिक व्यावसायिक शिक्षण-प्रशिक्षण के मामले में भारत फिसड्डी साबित हो रहा है। विकसित देशों में 15 से 35 वर्ष के बीच के 95 फीसदी युवा विभिन्न व्यावसायिक ट्रेडों में प्रशिक्षित होते हैं, जबकि भारत में मात्र दो फीसदी युवा व्यावसायिक ट्रेडों में प्रशिक्षित होते हैं।
भारत सरकार ने 2007-08 का बजट पेश करते हुए कौशल विकास के लिए पांच हजार करोड़ रूपए के कोष के साथ एक मिशन बनाने की घोषणा की थी और तत्काल उस मिशन के लिए एक हजार करोड़ रूपए उपलब्ध कराने की घोषणा की थी।
लेकिन वह मिशन किस प्रकार काम कर रहा है, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है। चालू वित्तीय वर्ष के अंतरिम बजट में इस मिशन के बारे में कहीं कोई चर्चा नहीं की गई है। भारत सरकार ने मिशन बनाने की घोषणा करते हुए कहा था कि कुल सत्रह मंत्रालयों द्वारा चलाए जा रहे अनौपचारिक व्य़ावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को ज्यादा असरदार बनाने के लिए यह मिशन जरूरी था और यह मिशन रेगुलेटरी बॉडी की तरह काम करेगा। लेकिन घोषणा के एक साल बाद भी अनौपचारिक व्यावसायिक शिक्षा काम काम पूर्ववत चल रहा है।

3 comments:

Satish Chandra Satyarthi said...

ब्लॉग जगत में हार्दिक स्वागत है आपका.
बड़ा ही अच्छा उद्देश्य लेकर चले हैं आप.
भारत को अगर एक विकसित राष्ट्र बनना है तो पारंपरिक शिक्षा की जगह व्यावहारिक शिक्षा को बढावा देना ही होगा.

समय चक्र said...

व्यावहारिक शिक्षा अत्यंत आवश्यक है . ब्लागजगत में स्वागत है आपका . शुक्रिया

संगीता पुरी said...

बहुत अच्‍छे उद्देश्‍य को लेकर आपने ब्‍लाग जगत में कदम रखा है ...ईश्‍वर आपको सफलता दें।