महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की तरह झारखंड में भी व्यावसायिक शिक्षा परिषद् का गठन होना चाहिए। झारखंड की सामाजिक और आर्थिक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया है।
जन शिक्षण संस्थान बोकारो के चेयरमैन श्री किशोर कुमार ने झारखंड सरकार को लिखे गए अपने पत्र में उपरोक्त बातों का उल्लेख करते हुए कहा है कि ऐसा करने से प्लस टू की शिक्षा हासिल करने के बाद युवाओं को मानक व्यावसायिक शिक्षा देने का रास्ता साफ हो जाएगा।
श्री कुमार ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा परिषद् के गठन के साथ ही शुरूआती दौर में 75 नए पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। परिषद् के गठन से माध्यमिक विद्यालयों में इंजीनियरिंग तथा प्रबंधन की पढ़ाई का भी रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार ने इसके लिए शुरूआती तौर पर 185,75 लाख रूपए का बजट स्वीकृत कर रखा है।
उन्होंने कहा है कि माध्यमिक शिक्षा परिषद् के अधीन ही व्यावसायिक शिक्षा का विषय रखने का प्रयोग विफल साबित हो चुका है। झारखंड राज्य मे कहीं भी माध्यमिक विद्यालयों में स्तरीय व्यावसायिक शिक्षा देना संभव नहीं हो पा रहा है। उत्तर प्रदेश में भी 35 व्यावसायिक पाठ्यक्रम माध्यमिक शिक्षा परिषद् के अधीन ही संचालित किए जा रहे थे। लेकिन व्यावसायिक शिक्षा को असरदार बनाने में कामयाबी नहीं मिली। तब उत्तर प्रदेश शासन को व्यावसायिक शिक्षा परिषद् का गठन के लिए कदम उठाना पड़ा।
श्री कुमार ने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार के अफसरों ने महाराष्ट्र तथा मध्य प्रदेश की तर्ज पर व्यावसायिक शिक्षा परिषद का गठन कर इसमें इंजीनियरिंग, प्रबंधन, मेडिकल कृषि तथा वाणिज्य से जुड़े आधुनिक विषयों को शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया। इससे जुड़े कई विभागों के प्रस्ताव का परीक्षण किया। विभागीय सूत्रों के मुताबिक नये शिक्षा सत्र से पहले इसका ढांचा तैयार हो जायेगा। इनमें इंटर पास करने वाले छात्रों को दाखिला दिया जायेगा। कोर्स में उन विषयों को शामिल करने का प्रस्ताव है जो पालीटेकिन्क में नहीं पढ़ाये जाते है।
उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार के प्ररूप के मुताबिक व्यावसायिक शिक्षा परिषद एक स्वतंत्र नियमित निकाय के रूप में कार्य करेगी। निजी क्षेत्रों में व्यावसायिक शिक्षा संचालित करने वाले विद्यालयों को मान्यता प्रदान करेगी तथा विभिन्न व्यवसायों का पाठ्यक्रम भी विकसित करेगी। इसके अलावा परीक्षाएं कराना एवं प्रमाण पत्र देने का कार्य भी परिषद का होगा। व्यावसायिक शिक्षा परिषद से जहां उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों की भीड़ नियंत्रित होगी वहीं 8 वीं, 10 वीं तथा 12 वीं कक्षा उत्तीर्ण अथवा विभिन्न स्तरों पर विद्यालय छोड़ चुके नवयुवकों को विभिन्न प्रकार के रोजगार परक व्यवसायों को अध्ययन करने का अवसर मिलेगा।
श्री कुमार ने कहा है कि झारखंड सरकार को भी ऐसा ही करना चाहिए। यह समय की मांग है। इससे झारखंड से छात्रों का पलायन रूकेगा और बेरोजगारी कम होगी।
जन शिक्षण संस्थान बोकारो के चेयरमैन श्री किशोर कुमार ने झारखंड सरकार को लिखे गए अपने पत्र में उपरोक्त बातों का उल्लेख करते हुए कहा है कि ऐसा करने से प्लस टू की शिक्षा हासिल करने के बाद युवाओं को मानक व्यावसायिक शिक्षा देने का रास्ता साफ हो जाएगा।
श्री कुमार ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा परिषद् के गठन के साथ ही शुरूआती दौर में 75 नए पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। परिषद् के गठन से माध्यमिक विद्यालयों में इंजीनियरिंग तथा प्रबंधन की पढ़ाई का भी रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार ने इसके लिए शुरूआती तौर पर 185,75 लाख रूपए का बजट स्वीकृत कर रखा है।
उन्होंने कहा है कि माध्यमिक शिक्षा परिषद् के अधीन ही व्यावसायिक शिक्षा का विषय रखने का प्रयोग विफल साबित हो चुका है। झारखंड राज्य मे कहीं भी माध्यमिक विद्यालयों में स्तरीय व्यावसायिक शिक्षा देना संभव नहीं हो पा रहा है। उत्तर प्रदेश में भी 35 व्यावसायिक पाठ्यक्रम माध्यमिक शिक्षा परिषद् के अधीन ही संचालित किए जा रहे थे। लेकिन व्यावसायिक शिक्षा को असरदार बनाने में कामयाबी नहीं मिली। तब उत्तर प्रदेश शासन को व्यावसायिक शिक्षा परिषद् का गठन के लिए कदम उठाना पड़ा।
श्री कुमार ने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार के अफसरों ने महाराष्ट्र तथा मध्य प्रदेश की तर्ज पर व्यावसायिक शिक्षा परिषद का गठन कर इसमें इंजीनियरिंग, प्रबंधन, मेडिकल कृषि तथा वाणिज्य से जुड़े आधुनिक विषयों को शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया। इससे जुड़े कई विभागों के प्रस्ताव का परीक्षण किया। विभागीय सूत्रों के मुताबिक नये शिक्षा सत्र से पहले इसका ढांचा तैयार हो जायेगा। इनमें इंटर पास करने वाले छात्रों को दाखिला दिया जायेगा। कोर्स में उन विषयों को शामिल करने का प्रस्ताव है जो पालीटेकिन्क में नहीं पढ़ाये जाते है।
उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार के प्ररूप के मुताबिक व्यावसायिक शिक्षा परिषद एक स्वतंत्र नियमित निकाय के रूप में कार्य करेगी। निजी क्षेत्रों में व्यावसायिक शिक्षा संचालित करने वाले विद्यालयों को मान्यता प्रदान करेगी तथा विभिन्न व्यवसायों का पाठ्यक्रम भी विकसित करेगी। इसके अलावा परीक्षाएं कराना एवं प्रमाण पत्र देने का कार्य भी परिषद का होगा। व्यावसायिक शिक्षा परिषद से जहां उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों की भीड़ नियंत्रित होगी वहीं 8 वीं, 10 वीं तथा 12 वीं कक्षा उत्तीर्ण अथवा विभिन्न स्तरों पर विद्यालय छोड़ चुके नवयुवकों को विभिन्न प्रकार के रोजगार परक व्यवसायों को अध्ययन करने का अवसर मिलेगा।
श्री कुमार ने कहा है कि झारखंड सरकार को भी ऐसा ही करना चाहिए। यह समय की मांग है। इससे झारखंड से छात्रों का पलायन रूकेगा और बेरोजगारी कम होगी।
3 comments:
अगर यह व्यवसायिक परिषद बनती है तो बेहद अच्छी बात होगी । राज्य में शिक्षा का स्तर बढ़ेगा और इससे पलायन रूकेगा ।
धन्यवाद। आप सबके समर्थन से सरकार पर दबाव बनेगा और व्यावसायिक शिक्षा परिषद के गठन का रास्ता साफ होगा।
बहुत अच्छी जानकारी उपलब्ध करवाई ... जल्दी ही काम शुरू हो जाना चाहिए ताकि युवाओं को रोजगार के लिए कुछ ज्ञान मिल सके ... धन्यवाद।
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