Tuesday, November 17, 2009

भारत में दो प्रतिशत श्रमिक ही प्रशिक्षित, जापान में यह आंकड़ा ९० प्रतिशत पार

भारत में मौजूदा समय में केवल 2 प्रतिशत श्रमिकों को ही कुशलता का प्रशिक्षण मिलता है और 80 प्रतिशत ग्रामीण और शहरी श्रमिकों के पास बाजार की जरूरतों के मुताबिक कुशलता नहीं होता है। लंबे समय से सरकार की सोच और साक्षरता की दर इस दिशा में एक बड़ी बाधा रही है।
नतीजतन भारत की विशाल आबादी के बावजूद सरकारी क्षेत्र सहित भारतीय कंपनियां तकनीकी उपकरणों के संचालन में सक्षम श्रम शक्ति का आयात करने के लिए मजबूर हैं। दूसरी तरफ जापान और जर्मनी में कौशल प्रशिक्षण का दर 90 प्रतिशत तक है।
भारत सरकार ने राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) की शुरुआत करके कौशल विकास की दिशा में सकारात्मक कदम उठाया है। 51 प्रतिशत और 49 प्रतिशत सार्वजनिक निजी साझेदारी वाले इस उपक्रम का लक्ष्य 2022 तक 30 प्रतिशत श्रमिकों को कुशल बनाना है। मौजूदा समय में करीब 17 मंत्रालय पहले ही 35 लाख लोगों को व्यावसायिक प्रशिक्षण दे चुके हैं। भारत में 1,200 से अधिक पॉलीटेक्निक, 5,000 से अधिक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान हैं। इनमें से ज्यादातर निजी क्षेत्र के द्वारा संचालित किये जाते हैं।
इसके अलावा हजारों की संख्या में राज्य स्तरीय प्रशिक्षण संस्थान और निजी क्षेत्र द्वारा संचालित केंद्र हैं। इसके बावजूद भारत गुणवत्ता और संख्या के लिहाज से कुशल श्रमिकों की गंभीर कमी से जूझ रहा है। योजना आयोग का आकलन बताता है कि भारत की श्रम शक्ति में प्रतिवर्ष शामिल होने वाले 1.28 करोड़ नए श्रमिकों में से ज्यादातर के पास कौशल प्रशिक्षण का कोई अवसर नहीं होता है।
योजना आयोग ने भी बताया है, भारत को जनसांख्यिकीय बढ़त हासिल है। यहां दुनिया की सबसे अधिक युवा आबादी रहती है। अगर कौशल की कमी के कारण आर्थिक विकास प्रभावित होता है तो यह डरावना होगा।

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