Saturday, March 21, 2009

साक्षर-नवसाक्षर हुनरमंदों के स्वनियोजन की प्रासंगिकता

बाजारवाद की आपाधापी में जब सरकार की भूमिका सिमटती जा रही है तो नियोजन भी प्रभावित होने लगा है। एक तरफ बहुत बड़ी फौज बेकार है तो दूसरी तरफ हुनरमंदों का घोर अकाल है। ऐसे में साक्षर-नवसाक्षर हुनरमंदों के स्वनियोजन की प्रासंगिकता बढ़ती जा रही है। इस दृष्टि से जन शिक्षण संस्थान की भूमिका व जिम्मेवारी बढ़ी है। यह कहना है जन शिक्षण संस्थान बोकारो के चेयरमैन किशोर कुमार का। श्री कुमार शनिवार को जेएसएस बोकारो मुख्यालय में आयोजित कायर्क्रम संभाग को संबोधित कर रहे थे।
श्री कुमार ने कहा कि जब दुनिया के विभिन्न देशों में रोजगार के लिए सामान्य शिक्षा की सीमाओं के मद्देनजर व्यावसायिक शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है तो भारत में इस दिशा में गंभीरता की घोर कमी दिख रही है। उदाहरण के लिए भारत में कुल 11 हजार आईटीआई व बीईटी स्कूल हैं तो चीन में पांच लाख सीनियर सेकेंड्री व्यावसायिक प्रशिक्षण व ट्रेनिंग स्कूल हैं। सभी उपलब्ध नए रोजगार में एक प्रतिशत सरकारी क्षेत्र में, दो प्रतिशत संगठित क्षेत्र में हैं और शेष 97 प्रतिशत असंगठित क्षेत्र में कायर्रत हैं। सरकार की भी अपनी सीमा है। ऐसे में इस देश में भी दूसरे पश्चिमी देशों की तरह स्वरोजगार में ही भविष्य देखने की जरूरत महसूस की जाने लगी है।
भारत सरकार की योजना जन शिक्षण संस्थान की शुरुआत स्वरोजगार व स्वनियोजन को बढ़ावा देने के मकसद से व्यावसायिक प्रशिक्षण की एडवोकेसी के लिए हुई है। समय-समय पर संस्थान अपनी ओर से प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाता भी रहा है। जन शिक्षण संस्थान बोकारो ने आगामी वित्तीय वर्ष में बोकारो में सक्रिय गैर सरकारी संगठनों द्वारा गठित स्वयं सहायता समूहों को विभिन्न ट्रडों में प्रशिक्षण देकर उसे स्वरोजगार की दिशा में अग्रसर करने के लिए सबल करने का लक्ष्य रखा है। इसी आलोक में जन शिक्षण संस्थान बोकारो शीघ्र ही कुछ स्वैच्छिक संगठनों को एसएचजी के गठन में सहयोग के साथ उन्हें प्रशिक्षण देने की सुविधा देने जा रहा है। आगामी वित्तीय वर्ष में यह संस्थान इंजीनियरिंग-नन इंजीनियरिंग कोटि में कम से कम दो दर्जन ट्रेडों में प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने जा रहा है। इसके लिए जिला में उपलब्ध प्रतिभाशाली इंस्ट्रक्टरों को प्राथमिकता दी जाएगी तथा इस दिशा में एक डाटा बैंक भी तैयार किया जा रहा है। इस काम के लिए जेएसएस बोकारो विभिन्न स्थानीय स्वैच्छिक संगठनों के संपर्क में भी है।

6 comments:

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

AAKASH RAJ said...

बहुत सुन्दर....
हिंदी ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है

Vivek Ranjan Shrivastava said...

आपके जन जागरण अभियान को नमन व मंगलकामनाये

गोविंद गोयल, श्रीगंगानगर said...

good luck, narayan narayan

जन शिक्षा ब्लॉग said...

शुभकामनाओं के लिए आप सब का आभार। भारत जैसे विशाल देश में, जहां आजादी के छह दशक बाद भी अशिक्षा और बेरोजगारी विकराल रूप धारण किए हुए है, विभिन्न स्तरों में इसके विरूद्ध पहल अनिवार्य हो गया है।

वन्दना अवस्थी दुबे said...

शुभकामनायें...स्वागत है.