पानी के सवाल को ले लंबे समय से झारखंड में सक्रिय अरविंद कुमार किसी पहचान के मोहताज नहीं। अविभाजित बिहार में बाढ़ मुक्ति अभियान जिस तरह सक्रिय था, कुछ उसी तरह की जरूरत झारखंड के लिए महसूस की गई। यहां वर्ष 1993 में अरविंद जी की अगुवाई में सुखाड़ विरोधी अभियान (एसह्वीए) का गठन हुआ। इस बैनर के तहत पानी के लिए छोटी संरचना, जल स्रोतों के संरक्षण-संवर्द्धन, छोटे माडल्स बनाने जैसे कार्य हुए। इसके तहत पानी के सवाल को ले एडवोकेसी चलती रही। इस अभियान के तहत किसान नीति, भूख के मानचित्रण व जल संकट की स्थिति को ले अध्ययन हुए। गत वर्ष 05 जून से 08 जून तक दुमका, जमशेदपुर व पलामू क्षेत्र से इन्हींकी अगुवाई में पानी की अधिकार यात्रा निकाली गई। इसके बाद नौ जून को रांची में प्रदेश स्तरीय संगोष्ठी भी हुई। अरविंद जी जल की उपलब्धता से लेकर उसकी गुणवत्ता तक को ले पुरजोर आवाज उठाई है। सुखाड़ विरोधी अभियान के तहत तो उन्होंने प्रदेश में नेतृत्वकारी भूमिका अदा की। इसी सक्रियता के मद्देनजर भारत सरकार ने उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार देने की घोषणा की है। सूत्रों की मानें तो लोक जागृति केंद्र के सचिव सह निदेशक अरविंद कुमार को उक्त पुरस्कार चुनाव के बाद दिया जा सकता है। गत वर्ष बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में राज्यपाल ने पानी के सवाल पर असाधारण योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया था। विदित हो कि संस्था देवघर जिला के मधुपुर में संचालित है।
Sunday, April 5, 2009
पानी के सवाल को ले अरविंद कुमार को राष्ट्रपति पुरस्कार
पानी के सवाल को ले लंबे समय से झारखंड में सक्रिय अरविंद कुमार किसी पहचान के मोहताज नहीं। अविभाजित बिहार में बाढ़ मुक्ति अभियान जिस तरह सक्रिय था, कुछ उसी तरह की जरूरत झारखंड के लिए महसूस की गई। यहां वर्ष 1993 में अरविंद जी की अगुवाई में सुखाड़ विरोधी अभियान (एसह्वीए) का गठन हुआ। इस बैनर के तहत पानी के लिए छोटी संरचना, जल स्रोतों के संरक्षण-संवर्द्धन, छोटे माडल्स बनाने जैसे कार्य हुए। इसके तहत पानी के सवाल को ले एडवोकेसी चलती रही। इस अभियान के तहत किसान नीति, भूख के मानचित्रण व जल संकट की स्थिति को ले अध्ययन हुए। गत वर्ष 05 जून से 08 जून तक दुमका, जमशेदपुर व पलामू क्षेत्र से इन्हींकी अगुवाई में पानी की अधिकार यात्रा निकाली गई। इसके बाद नौ जून को रांची में प्रदेश स्तरीय संगोष्ठी भी हुई। अरविंद जी जल की उपलब्धता से लेकर उसकी गुणवत्ता तक को ले पुरजोर आवाज उठाई है। सुखाड़ विरोधी अभियान के तहत तो उन्होंने प्रदेश में नेतृत्वकारी भूमिका अदा की। इसी सक्रियता के मद्देनजर भारत सरकार ने उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार देने की घोषणा की है। सूत्रों की मानें तो लोक जागृति केंद्र के सचिव सह निदेशक अरविंद कुमार को उक्त पुरस्कार चुनाव के बाद दिया जा सकता है। गत वर्ष बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में राज्यपाल ने पानी के सवाल पर असाधारण योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया था। विदित हो कि संस्था देवघर जिला के मधुपुर में संचालित है।
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1 comment:
जानकारी के लिए धन्यवाद ... अरविंद जी को बधाई।
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