शिक्षा को महज व्यवसाय बनाने में जुट गई हैं अनेक कंपनियां। प्रतिबद्धता के अभाव में शिक्षा के मूल्यों में कितनी गिरावट होगी, यह विचारणीय है। इस पर व्यापक बहस की जरूरत है।
हाल ही एक खबर आई है कि मंदी की मार से कराह रही रियल इस्टेट कंपनियों ने अब शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखना शुरू कर दिया है। कम से कम चार बड़ी कंपनियों ने शिक्षा के क्षेत्र में मोटी रकम इनवेस्ट करने की योजना बनाई है।
इन कंपनियों के मालिकों का कहना है कि शिक्षा का क्षेत्र व्यवसाय के दृष्टिकोण से ज्यादा सेफ है और इस पर मंदी का असर नहीं है। इन कंपनियों के प्रमोटरों को लगता है कि उनके लिए शिक्षण संस्थानों को इकोनामिकल बनाना ज्यादा आसान है। इसलिए कि उनके पास जमीन और दूसरे बुनियाढ़ांचे की कमी नहीं है।
1 comment:
उच्चतम न्यायालय ने यह कह कर बहस ख़त्म कर दी है कि फीस तय करने का अधिकार सरकार का है न कि शिक्षा संस्थानों का (भले ही बात अभी स्कूलों की है)...मतलब साफ है कि शिक्षा को एेसे ही धंधा समझने वालों को अपना रवैया बदलना होगा.
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