Sunday, August 30, 2009

“पत्रकारिता की बदलती चुनौतियों के आलोक में रोजगार की सेहत” पर बोकारो में संगोष्ठी

बोकारो ३० अगस्त। जन शिक्षण संस्थान बोकारो ने “पत्रकारिता की बदलती चुनौतियों के आलोक में रोजगार की सेहत” पर आगामी 2 सितंबर को चास स्थित अपने परिसर में एक संगोष्ठी आयोजित की है। पत्रकारिता की चुनौतियों पर शुरू व्याख्यानमाला की इस पहली कड़ी के वक्ता दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार श्री सत्येंद्र रंजन हैं।
मीडिया और बाजार के घालमेल से इस क्षेत्र के रोजगार के सामने बढ़ रही चुनौतियों के संदर्भ में उक्त विषय प्रासंगिक हो गया है। जनतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जानेवाला मीडिया वही नहीं रहा, जो गणेश शंकर विद्यार्थी व पराड़कर के दौर में था। बदलते जमाने के साथ मूल्य और सरोकारों में बदलाव समेत उसमें कई ढांचागत (अंतर्वस्तु व स्वरूप के स्तर पर) बदलाव आए और भूमंडलीकरण ने तो मीडिया को जैसे निर्बंध बाजारवाद का खुला चारागाह बना दिया। बाजारवाद से जूझने की उम्मीद जिस मीडिया से थी, इन्हीं जैसे कारणों ने उसे क्रमशः विषहीन कर दिया। और अब आर्थिक मंदी ने इसे और भी क्रूर व तीव्र किया है।
सभी के गिरेबान में झांकनेवाले मीडिया का संकट गहराया है तो इसका एक कारण यह भी है कि उसने आत्ममंथन करना छोड़ दिया। लंपट बाजारवाद के सामने मीडिया अब बेहद निरीह सा हो गया है। ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि इसकी बढ़ती चुनौतियों के संदर्भ में इस क्षेत्र में रोजगार की अपेक्षाओं व संभावनाओं की पड़ताल की जाए।
इसी आलोक में जन शिक्षण संस्थान बोकारो ने बाईपास रोड, चास स्थित अपने कार्यालय में व्याख्यानमाला की पहली कड़ी के रूप में संगोष्ठी आयोजित की है। इसके वक्ता प्रतिष्ठित पत्रकार सत्येंद्र रंजन भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली के अतिथि व्याख्याता तथा एनडीटीवी के पूर्व समाचार संपादक हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 20 वर्षों का अनुभव रखने वाले सत्येंद्र रंजन को विदेश मामलों में खासी रुचि एवं जानकारी है तथा खेल, विशेषकर फुटबॉल पर लिखने में भी महारत रखते हैं।

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