लाभ वाले केंद्र सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठानों को अब कम से कम आधा प्रतिशत और अधिकतम पांच प्रतिशत तक धनराशि कारपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) पर अनिवार्य रूप से ख्रर्च करना होगा। यदि किसी साल इस मद की धनराशि उसी साल नहीं खर्च हो पाई तो उससे लैप्स नहीं होने देकर अलगे साल खर्च किया जाएगा।
ऐसा प्रस्ताव लोक उद्यम विभाग (डिर्पाटमेंट आफ पब्लिक इंटरप्राइजेस) द्वारा तैयार किया है। माना जा रहा है कि इस प्रस्ताव पर अमलीजामा पहनाए जाने से मुनाफे वाली कंपनियों की कारपोरेट सामाजिक दायित्व संबंधी नीतियां और भी असरदार होंगी।
इस बाबत द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित समाचार के मुताबिक वित्त वर्ष 2007-08 के परिणामों के अनुसार, पब्लिक सेक्टर इकाईयों को कम से कम 1500 खर्च करना है। 244 पब्लिक सेक्टर इकाईयों में से 160 पब्लिक सेक्टर इकाईयों ने वित्त वर्ष 2007-08 में 91,083 करोड़ रूपए शुद्भ लाभ कमाया है, जिनका 2 % 18,21 करोड़ रूपए होता है।
प्रस्ताव के अनुसार, ऐसी पब्लिक सेक्टर इकाई जिसका लाभ 500 करोड़ रूपए होगी, अपने लाभ का 2 % से अधिक की धनराशि सीएसआर पर खर्च करेगी। पब्लिक सेक्टर इकाइयां, जिनके लाभ 100 करोड़ रूपए से 500 रूपए के बीच होंगे, वे उस लाभ का 2-3 % सीएसआर पर खर्च करेगी।
सूत्रों का कहना है कि लोक उद्यम विभाग (डिर्पाटमेंट आफ पब्लिक इंटरप्राइजेस) ने इस नए प्रस्ताव पर सचिवों की समिति से परिचर्चा की है। अधिकांश मंत्रीगण इस बारे में समहत है। सचिवों की समिति ने इसे हरी झंडी दे दी है और इसे कैबिनेट में स्वीकृति के लिए रखा जाएगा।
लोक उद्यम विभाग (डिर्पाटमेंट आफ पब्लिक इंटरप्राइजेस) ने कहा है कि पीएसयूएस की सीएसआर गतिविधियां यूनाइटेट नेशन्स ग्लोबल काम्पैक्ट प्रोग्राम से समन्वयित होंगे।
लोक उद्यम विभाग सरकारी क्षेत्र के सभी उद्यमों के लिए एक नोडल अभिकरण के रूप में कार्य करता है तथा अर्थव्यवस्था में सरकारी उद्यमों की भूमिका संबंधी नीति के प्रतिपादन में सहायता करता है और साथ ही यह विभाग कार्य निस्पादन में सुधार एवं मूल्यांकन, विभागीय लेखांकन, कार्मिक प्रबंध तथा संबंधित क्षेत्र में नीतिगत दिशा-निर्देशों का निर्धारण भी करता है।
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