गैर सरकारी संगठन चाइल्ड राइट एंड यू (क्राई) की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक देश में नौ साल तक की उम्र की 53 प्रतिशत लड़कियां स्कूल नहीं पहुंच पातीं।
प्रतिदिन सात हजार लड़कियों को पेट में ही मौत की नींद सुला दी जाती है।
ग्रामीण इलाकों में 15 प्रतिशत लड़कियों की शादी 13 साल की उम्र में ही कर दी जाती है। इनमें से लगभग 52 प्रतिशत लड़कियां 15 से 19 साल की उम्र में गर्भवती हो जाती है।
73 प्रतिशत लड़कियों में खून की कमी है। वहीं अगर उनको डायरिया हो जाता है तो 28 फीसदी को कोई दवा नहीं मिल पाती।
एक अनुमान के अनुसार 24 प्रतिशत लड़कियों को शिक्षा से वंचित रहना पड़ रहा है। जो पढ़ना शुरू कर भी देती है उनमें से 60 प्रतिशत सेकेंड्री स्कूल तक भी नहीं पहुंच पाती है।
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