Tuesday, October 13, 2009

हुनर ने बदल दी जिंदगी की तस्वीर

हुनर के बिना पढ़ाई उसी तरह बेकार है जैसे आत्मा के बगैर शरीर। हुनर से मुकाम पाकर ही शिक्षा सार्थक होती है। बेकारी और परिवार की जिम्मेवारी से जीवन किस तरह विषाक्त हो जाता है, इसे झारखंड के बोकारो जिले की उसरडीह पंचायत के बिजुलिया मोड़ के राजेश कुमार महतो ने काफी करीब से देखा है। आज जब वह प्रतिमाह 1500 से 2000 रुपए प्रतिमाह की कमाई करने लगा है तो उसे जीवन में हुनर की जरूरत और अहमियत समझ में आ गई है। इस तब्दीली के लिए वह जन शिक्षण संस्थान बोकारो को श्रेय देता है।
उसरडीह बिजुलिया का राजेश कुमार महतो, पिता मोहन महतो के पास थोड़ी-बहुत जमीन है भी तो उससे बस एक ही फसल धान की उपज होती है। मैट्रिक तक की शिक्षा ग्रहण करने के बावजूद कोई भी छोटा-मोटा रोजगार नहीं था। शादीशुदा होने के कारण दो दर्जन लोगों का संयुक्त परिवार चला पाना मुश्किल था। लचर आर्थिक स्थिति के कारण आगे की पढ़ाई जारी रख पाना बेहद मुश्किल था। किसी कार्य विशेष में दीक्षित न होने के कारण कोई नौकरी भी मुश्किल थी। बेकारी के इसी दौर में उसे व्यावसायिक प्रशिक्षण की जरूरत महसूस हुई। किसी दोस्त से उसे जन शिक्षण संस्थान बोकारो द्वारा तालगड़िया मोड़ में चलाए जा रहे इलेक्ट्रीशियन के प्रशिक्षण की जानकारी मिली। इसी केंद्र से राजेश ने छह माह तक इलेक्ट्रीशियन ट्रेड में प्रशिक्षण लिया। हुनरमंद होने के बाद खाली हाथ वह एक जगह तलाशने लगा। खाली हाथ होने का अब उसे कोई मलाल नहीं था, क्योंकि अब वह आत्मविश्वास से लबरेज था। इसी आत्मविश्वास के सहारे उसने किराए का एक कमरा सिर्फ इस भरोसे पर ले लिया कि जो आय होगी उससे वह किराया दे देगा।
अब टूल्स हासिल करने की उसकी यात्रा शुरू हुई। किसी तरह उसने इधर-उधर से टूल्स का जुगाड़ कर लिया। धीरे-धीरे काम मिलने लगा। अब तो हाल यह है कि उसकी मासिक आमदनी कम से कम दो हजार रुपए प्रतिमाह होने लगी है। अब लोगों के बीच वोकेशनल ट्रेनिंग की एडवोकेसी करने लगा है।

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