हिंदी पत्रकारिता के शिखर पुरूष प्रभाष जोशी के निधन से हिंदी और पत्रकारिता ही नहीं, बल्कि जन सरोकारों वाले आंदोलनों को भी धक्का लगा है। विलक्षण प्रतिभा के धनी प्रभाष जी ने अपने पत्रकारीय धर्म का निर्वहन करते हुए जन मानस में वह जगह बनाई, जो शायद ही किसी को नसीब होता है।
जनसत्ता अखबार के प्रकाशन के साथ ही हिंदी पत्रकारिता को नया आयाम देने वाले प्रभाष जोशी मर कर भी अमर रहेंगे। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।
2 comments:
दुखद. मेरी विनम्र श्रद्धांजलि.
जोशी जी और उनके विचार
फैलाते हैं उज्ज्वलता का प्रकाश
विनम्र श्रद्धांजलि माननीय प्रभाष।
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